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14बनाने वाले के बारे में

Reiner Endrios

यह मेरा असली नाम नहीं है। मेरे उस हिस्से का नाम, जो रुका रहा।

मेरी पूरी ज़िंदगी उस दिन पलट गई, जब मुझे समझ आया कि मैं औरों से अलग हूँ। मुझे शर्म आई, क्योंकि मुझे लगता था कि यह ग़लत है। फिर मैंने जाना, और जाना, और जाना।

पर किसी को बताने से मुझे हमेशा डर लगता था। इतना डर कि जब भी कोई बात मेरी सच्चाई के क़रीब पहुँचती, साँस थम जाती, सोचना बंद हो जाता।

कॉलेज में क़दम रखते वक़्त उम्मीद थी कि अब शायद खुलकर बात हो सकेगी। पर जल्दी ही दिख गया कि लोगों के समझने की बात बस एक अंदाज़ा थी। मैंने इसका मज़ाक उड़ते सुना। इसे एक चलन कहते सुना। इसे बीमारी कहते सुना। इसने मुझे तोड़ दिया, फिर भी मैंने ख़ुद से हार नहीं मानी।

जब मैंने लोगों को बताना शुरू किया, तो सब कुछ मेरी उम्मीद से अलग निकला। जिनके बारे में मुझे पक्का यक़ीन था कि वे मुझे कभी नहीं अपनाएँगे, उन्होंने सबसे ज़्यादा साथ दिया। और जिन पर मेरा सबसे ज़्यादा भरोसा था, उनमें से कुछ दूर हो गए।

इससे दुख हुआ। पर इसने मुझे यह भी सिखाया कि जो दोस्त और घरवाले मुश्किल दौर में भी डटे रहे, उनकी क़दर कैसे की जाती है। लोगों को मेरी तरफ़ से अनगिनत मौक़े मिलते हैं, क्योंकि मुझे उनमें दुनिया के बताए से ज़्यादा अच्छाई दिखती है। मैं कोई संत नहीं हूँ। मुझसे भी ग़लतियाँ हुई हैं, मुझे माफ़ किया गया, और मैंने वहीं से सीखा।

मैंने यह जगह उन सबके लिए बनाई है जो अब भी मानते हैं कि यह एक चुनाव है, अगर वे प्रमाण पढ़ने को तैयार हों। और उनके लिए भी, जो ख़ुद जूझ रहे हैं, या किसी जूझते हुए इंसान को प्यार करने की कोशिश में हैं। यहाँ आपका स्वागत है। मेरे मन में किसी के लिए नफ़रत नहीं है। मेरी बस इतनी गुज़ारिश है कि प्यार करने वालों को कोई नफ़रत न थमाए।

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Reiner